वो सुबह कभी तो आएगी ......
जब समाचार का पहला शब्द करोना न हो
जब बाहर निकलने से पहले मास्क न ढूंढना पड़े
किसी भी ठेलें पर खाना फिर स नसीब हो
यहां वहां हाथ लगने से ब्लड प्रेशर ना बढ़ता रहे
वो सुबह कभी तो आयेगी .......
जब वर्क फ्राॅम होम के चक्कर से मुक्ति मिलें
जब राशन न मिलनें के डर से रोज ब्रेड लाना पडे
जब 8 कमरों में से आज कौन से कमरों का झाडू पोछा करूँ
ये सोचते सोचते कामवाली बाईंयो की बेकार की गपशप सुनाई दे
वो सुबह कभी तो आयेगी .......
सभी परीक्षार्थी के पास अपना अपना टाइम टेबल बराबर हो
कामयाबी चूमने की ज़िद कुछ कर गुजरने का जुनून सबमें दोबारा जाग उठे
होस्टल फिर स खुलें, मेस का वहीं बोरिंग खाना नसीब तो हो
रोज़ी रोटी छोड़ टॅन्करों में लोगों की भीड़ मे घुसकर गाँव न जाना पड़े
वो सुबह कभी तो आयेगी ........
जब बिना परीक्षा के ऊंची कक्षा में गए बच्चे छुट्टीयोंमें घर पर कैद न हो
जब अकेले रहते घूमते बुजुर्ग अपने मित्र परिवार में फिर से घुल मिल सकें
तंदुरुस्ती और मनचाहे फिगर के चहेते पूरी जोश से अपने वर्कआऊट कर पाएं
जब छुट्टी पे आए मेहमान अपने परिवार और कर्मभूमि में दोबारा लौट सकें
वो सुबह आएगी जरूर ........
जब समाचार का पहला शब्द करोना न हो
जब बाहर निकलने से पहले मास्क न ढूंढना पड़े
किसी भी ठेलें पर खाना फिर स नसीब हो
यहां वहां हाथ लगने से ब्लड प्रेशर ना बढ़ता रहे
वो सुबह कभी तो आयेगी .......
जब वर्क फ्राॅम होम के चक्कर से मुक्ति मिलें
जब राशन न मिलनें के डर से रोज ब्रेड लाना पडे
जब 8 कमरों में से आज कौन से कमरों का झाडू पोछा करूँ
ये सोचते सोचते कामवाली बाईंयो की बेकार की गपशप सुनाई दे
वो सुबह कभी तो आयेगी .......
सभी परीक्षार्थी के पास अपना अपना टाइम टेबल बराबर हो
कामयाबी चूमने की ज़िद कुछ कर गुजरने का जुनून सबमें दोबारा जाग उठे
होस्टल फिर स खुलें, मेस का वहीं बोरिंग खाना नसीब तो हो
रोज़ी रोटी छोड़ टॅन्करों में लोगों की भीड़ मे घुसकर गाँव न जाना पड़े
वो सुबह कभी तो आयेगी ........
जब बिना परीक्षा के ऊंची कक्षा में गए बच्चे छुट्टीयोंमें घर पर कैद न हो
जब अकेले रहते घूमते बुजुर्ग अपने मित्र परिवार में फिर से घुल मिल सकें
तंदुरुस्ती और मनचाहे फिगर के चहेते पूरी जोश से अपने वर्कआऊट कर पाएं
जब छुट्टी पे आए मेहमान अपने परिवार और कर्मभूमि में दोबारा लौट सकें
वो सुबह आएगी जरूर ........